Shalini Dikshit

Comedy

4.5  

Shalini Dikshit

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महाभारत की सीख : पौराणिक कथा

महाभारत की सीख : पौराणिक कथा

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प्रिया ने आज मन में सोच लिया है कि आज वह चिंटू को स्कूल छोड़ने जाएगी तो उन महाशय से बात जरूर करेगी। 

प्रिया अपने ५ साल के बेटे चिंटू को पास के स्कूल में रोज सुबह छोड़ने जाती है यह उसका प्रति दिन का एक रूटीन है। एक आदमी भी अपने बेटे को छोड़ने आता है, उसकी नजरें, उसकी हरकतें प्रिया को अच्छी नहीं लगती हैं। वो उसकी तरफअजीब तरह से घूरता हैं। अगर वह पहले आ जाता हैं तो साइड में रुक कर इंतजार करता हैं, कभी स्कूल के अंदर तक जाना हुआ तो धक्का-मुक्की भी कर देता हैं। अब तक प्रिया चुप रह रही थी, वो १० - १५ दिन से यही नाटक देख रही है पर आज उसने सोच लिया है कि आज वह उस से बात करके रहेगी और जरूरी लगा उसको दिन में तारे दिखा देगी। 

स्कूल के गेट पर चिंटू को छोड़कर प्रिया उससे बाय करती रही क्योंकि चिंटू की आदत है वह दूर तक अंदर जाता है तो मुड़ - मुड़कर बाय करता रहता है। 

रोज की तरह वह आदमी सड़क के दूसरी तरफ खड़ा था; वह अपने बच्चे को छोड़ चुका था और अब अकेले खड़ा था। उसने प्रिया की तरफ देखकर शायद आज स्माइल करने की सोची। प्रिया ने उसकी तरफ बहुत कड़क नजरों से देखा कड़क नजरों से उसकी तरफ देखा तो वो सकपका गया और इधर - उधर देखने लगा। 

प्रिया आज उसका पूरा हिसाब - किताब करने के लिए उसकी तरफ बढ़ चली। वो भी आज पूरी हिम्मत दिखाते हुए प्रिया की तरफ बढ़ा आ रहा था। सड़क पर बहुत ट्रैफिक तो नहीं था लेकिन फिर भी वो इक्का - दुक्का वाहनों से बचता हुआ सावधानी से प्रिया की तरफ सड़क के पार आ रहा था। 

"आ जा बच्चू आज तेरी अक्ल सही और शक्ल न बिगाड़ दी तो मेरा नाम भी प्रिया नहीं।" 

प्रिया उसे सड़क पार करता देखते हुए सोच रही थी। 

लेकिन तभी कुत्तो का दौड़ाया हुआ गायों का एक झुण्ड भी तेजी से सड़क पार करने लगा। गांयों को इस तरह भागते देख कर वो कुछ गड़बड़ा सा गया और एक गांय की चपेट में तेजी से सड़क के किनारे आ गिरा। वो गिरा तो इस तरह गिरा की सड़क के किनारे पड़े गांय के गोबर में उसका चेहरा जा लगा। गोबर की वजह उसका मूँह तो फूटने से बच गया लेकिन गोबर की वजह से उसका चेहरा हरा - काला हो गया। 

उसकी हालत देख कर सड़क के आस - पास खड़े लोगो ने जोर का ठहाका लगाया। वो गोबर में इतना सना हुआ था कि लोग हँस तो रहे थे लेकिन कोई उसके पास जाकर उसे उठाने की कोशिश नहीं कर रहा था। 

उसकी हालत देख कर प्रिया को भी बहुत हंसी आ रही थी लेकिन वह हंसी नहीं और उसके पास जाकर बोली, "ऐसी ही परेशान करने वाली और बेइज्जत करने वाली हरकतों से परेशान होकर द्रौपदी ने दुर्योधन को बोल दिया था- 'अंधे का पुत्र अंधा,' तो आज तक लोग द्रौपदी और उसकी हंसी को महाभारत होने का दोष देते हैं पर दुर्योधन का दोष कम लोगों को ही दिखता है; इसलिए आज मैं तेरे ऊपर हंसी नहीं बल्कि तुझे समझा रही हूँ तू पिछले पंद्रह दिनों से जो हरकते कर रहा है उन्हें बंद कर दे वरना अच्छा नहीं होगा।"


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