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Avinash Agnihotri

Abstract Classics Inspirational

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Avinash Agnihotri

Abstract Classics Inspirational

बदलाव

बदलाव

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उनका हमेशा से यह मानना था कि नोकरी से रिटायर्मेंट के बाद व्यक्ति अपनी दिनचर्या बदलने के कारण बहुत आलसी और जल्द ही बूढ़ा दिखने लगता है।

इसलिए उन्होंने यह तय किया था कि कुछ भी हो जाए, पर वे कभी अपनी दिनचर्या नही बदलेंगे।तभी रोज की तरह आज भी,अलसुबह ही तैयार हो गार्डन चेयर पर बैठे यह सोच मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।

कि तभी पत्नी की पायजेब की खनक से उनकी यह तन्द्रा टूटी।

और वे अपनी पत्नी के हाँथ से चाय की प्याली थामते हुए,बड़े ही आश्चर्यजनक लहजे में उससे पूछते है। आज सुबह का अखबार मेरी मेज़ पर क्यो नही है।

क्या तुम यह भूल गई कि चाय पीते हुए अखबार पढ़ना मेरी पुरानी आदत है।

उनकी बात सुन,फिर पत्नी अपनी नजरें नीचे कर, चहरे पर मायूसी के भाव लिए धीरे से बुदबुदाई।

"जी वह बहु कहती है कि अबसे सुबह का अखबार पहले राजीव ही पढा करेंगे "।

क्योकि आप ही कि तरह सुबह अखबार पढ़ने की आदत के कारण। वह रोज ऑफिस जाने के लिए लेट हो जाता है,और फिर आप तो अब सारा दिन घर पर ही है।


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