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Sonia Goyal

Abstract Romance Fantasy


4.5  

Sonia Goyal

Abstract Romance Fantasy


अरेंज्ड लव मैरिज

अरेंज्ड लव मैरिज

6 mins 268 6 mins 268

रमन की इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी होते ही उसे एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिल गई थी। रमन के घर में उसके मम्मी पापा और एक छोटी बहन थी। रमन की जिंदगी हंसी-खुशी चल रही थी कि उसके ऑफिस में शेफाली नाम की लड़की उसके साथ ही कार्यरत हुई।

शेफाली को देखकर ऐसा लगता था कि भगवान ने बड़ी ही फुर्सत से उसे बनाया है। उसकी अच्छी कद-काठी, नीली आंखें, लंबे बाल किसी को भी अपना दीवाना बना सकते थे। और यही रमन के साथ भी हुआ। वो शेफाली को देखते ही उसका दीवाना हो गया।

रमन शेफाली का सीनियर था तो शेफाली को काम सिखाने की जिम्मेदारी रमन की थी। रमन के लिए तो ये सोने पर सुहागे की बात थी। वो भी हर समय शेफाली के साथ ही समय बिताना चाहता था।

धीरे-धीरे शेफाली भी उसकी दीवानी होती चली गई और यहीं से उन दोनों के प्यार की शुरुआत हुई। दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे और जल्द ही एक दूसरे से शादी करना चाहते थे। पर मुश्किल ये थी कि घर वालों को मनाएं कैसे, क्यूंकि दोनों अलग-अलग जाति से संबंध रखते थे।

शेफाली के घर वाले तो मान भी जाते, पर रमन के घर वाले इस शादी के लिए कभी तैयार नहीं होते। दोनों ने तय किया कि कुछ भी हो जाए वो अपने घर वालों को मनाकर ही रहेंगे और उनकी रजामंदी से ही शादी करेंगे। चाहे कुछ भी हो जाए न तो वो किसी और से शादी करेंगे और न ही घर वालों की मर्जी के खिलाफ जाकर भागकर शादी करेंगे।

  उन दोनों ने हिम्मत करके अपने-अपने घर वालों को एक दूसरे के प्यार के बारे में बताया। पहले तो दोनों परिवार वाले बहुत गुस्सा हुए। पर फिर बेटी की खुशी के लिए शेफाली के परिवार वाले इस शादी के लिए राजी हो गए। लेकिन रमन के पापा ने साफ-साफ मना कर दिया कि चाहे कुछ हो जाए ये शादी नहीं हो सकती।

शेफाली ने सारी बात रमन को बताई कि उसके परिवार वालों को इस शादी से कोई भी ऐतराज नहीं है। उधर रमन ने भी शेफाली को बताया कि उसके पापा इस शादी के लिए नहीं माने। उसकी बात सुनकर शेफाली बहुत रोयी। रमन ने उसे हिम्मत देते हुए कहा कि तुम रो मत। मेरी शादी अगर होगी तो तुमसे ही होगी अन्यथा किसी से भी नहीं होगी। उसकी बात सुनकर शेफाली को थोड़ी हिम्मत मिली।

रमन ने शेफाली से बात करने के बाद अपनी मां से बात की। उन्होंने भी ये बात ही बोली कि मुझे तेरी शादी से कोई ऐतराज नहीं है पर तेरे पापा को मनाना मेरे वस की बात नहीं है। रमन उनकी बात सुनकर एक बार के लिए तो मायूस हो गया। फिर उसने हिम्मत करके अपने पापा से बात की और उनको समझाने की कोशिश की। पर कोई फायदा नहीं हुआ।

देखते-ही-देखते एक वर्ष का समय बीत गया। सब कुछ वैसा का वैसा ही था। रमन अपने पापा से शेफाली के बारे में बात करता और वो उसे चुप करवा देते। उसके पापा उसकी शादी किसी और से करवाने के लिए दबाव बनाते। पर रमन ने साफ बोल दिया था कि वो शादी करेगा तो सिर्फ शेफाली से।

उधर रमन के पापा को न मानते देख शेफाली के घर वाले भी उसकी शादी कहीं और करने की बात करने लग गए थे। पर शेफाली ने भी साफ बोल दिया कि मैं शादी करूंगी तो सिर्फ रमन से।

  ऐसे ही समय बीतता गया और एक दिन रमन के पास किसी का फोन आया कि आपके पिताजी का एक्सीडेंट हो गया है और वो सिटी हाॅस्पिटल में है। आप जल्दी आ जाइए। रमन जल्दी-जल्दी हाॅस्पिटल पहुंचा। डाॅक्टर ने उसे बताया कि अगर थोड़ी भी देर होती उनके इलाज में तो उनकी जान भी जा सकती थी। पर शुक्र है उन्होंने आपके पिताजी को सही समय पर अस्पताल पहुंचा दिया। अब आपके पिताजी खतरे से बाहर है। आप उनसे मिल सकते है।

ये सुनकर रमन की जान में जान आई और वो दौड़ता हुआ अपने पापा के पास गया। उनको इस हालत में देखकर उसके तो आंसू ही नहीं रूक रहे थे। उसके पापा ने जब उससे कहा कि मैं ठीक हूं तब जाकर वो चुप हुआ।

उसके पापा ने रमन से कहा कि अगर तूझे मेरी इतनी ही चिंता है तो मैं जिससे बोलूंगा उससे शादी कर ले। उनकी बात सुनकर रमन बोला,"पापा आप पहले ठीक हो जाइए। इस बारे में हम बाद में बात करेंगे।"

 "बाद में कब जब मैं इस दुनिया से विदा हो गया तब??" रमन के पापा ने कहा।

उनकी ये बात सुनकर रमन के मुंह से सिर्फ एक ही बात निकली कि ठीक है पापा आप जैसा कहेंगे वैसा ही होगा। बस आप जल्दी से ठीक हो जाइए।

कुछ दिनों बाद उसके पिताजी ठीक होकर घर वापिस आ गए। घर आने के कुछ दिनों बाद उन्होंने रमन से कहा,"मैंने तुम्हारे लिए लड़की देख ली है और तुम्हारी शादी उससे ही होगी।"

 इससे पहले कि रमन कुछ बोलता उसके पापा बोले,"याद है ना अस्पताल में तुमने मुझसे क्या कहा था। अब बस कोई बहाना नहीं चलेगा। ये लड़की की फोटो है देख लेना। तुम्हें पसंद आए या न तुम्हारी शादी इससे ही होगी।"

इतना कहकर वो वहां से चले जाते है। रमन का रो रोकर बुरा हाल था। उसनेे शेफाली को फोन किया पर उसने उठाया नहीं। काफी बार फोन लगाने के बाद उसने फोन उठाया और सिर्फ इतना ही बोला,"रमन तुमने कुछ ज्यादा ही समय ले लिया पर अपने पापा को नहीं मना पाए। मेरे घरवालों ने मेरी शादी तय कर दी है। हो सके तो मुझे माफ़ कर देना और मुझे भूल जाना। पर अब कुछ नहीं हो सकता।"

ये बोलकर शेफाली फोन काट देती है। रमन को लगता है जैसे उसकी दुनिया ही खत्म हो गई हो। वो उस लड़की की फोटो को बिना देखे वहीं रखकर सोने के लिए चला जाता है।

 अगले दिन उसके पापा उससे बोलते है,"जल्दी तैयार हो जाओ आज हमें लड़की वालों के यहां जाना है। आज ही तुम दोनों का शगुन कर देंगे और शादी का मुहूर्त निकलवा लेंगे।"

 रमन मन मारकर तैयार हो जाता है। फिर सब लोग लड़की वालों के यहां जाने के लिए निकल जाते हैं। कुछ देर बाद लड़की हाॅल में आती है और जैसे ही बोलती है तो रमन एक दम से उसके चेहरे को देखता है और हैरान रह जाता है। क्यूंकि वो लड़की कोई और नहीं बल्कि शेफाली थी। रमन कभी अपने पापा को देखता तो कभी शेफाली को।

 उसे ऐसा करते देख सब हंसने लग जाते हैं। फिर रमन के पापा उससे कहते है,"तुम यहीं सोच रहे हो ना कि शेफाली यहां कैसे। तो मैं बताता हूं, तुम्हें याद है ना कि कुछ दिन पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया था और डाॅक्टर ने तुमसे कहा था कि अगर मैं सही समय पर अस्पताल न पहुंचता तो मेरी जान भी जा सकती थी। तुम्हें पता है मुझे सही समय पर अस्पताल किसने पहुंचाया?? चलो ये भी मैं ही बताता हूं वो कोई और नहीं शेफाली ही थी।"

ये बात सुनकर रमन ने शेफाली की तरफ देखा तो उसने भी मुस्करा कर हां में सिर हिला दिया। फिर उसके पापा ने कहा,"मैंने तुम दोनों की शादी के लिए मना कर दिया था। फिर भी इसने बिना किसी गुस्से के मेरी मदद की और मुझे अस्पताल लेकर गई। बस तभी मैंने तय किया कि तुम्हारी शादी शेफाली से ही होगी।"

इस पर रमन ने उनसे पूछा कि ये बात आपने मुझे पहले क्यूं नहीं बताई??

फिर उसके पापा बोले कि बस तुम्हें थोड़ा सा तंग करना चाहते थे इसलिए नहीं बताया। मैंने शेफाली को भी अपने प्लान में शामिल कर लिया और इसने भी तुमसे बोल दिया कि इसकी शादी तय हो गई है।

रमन के मुंह से सिर्फ एक ही बात निकली,"आप लोगों ने तो मेरी जान ही निकाल दी थी।"

उसकी ये बात सुनकर सब हंस पड़े। फिर दोनों के शगुन की रस्म हुई और तय मुहूर्त पर बड़ों के आशीर्वाद से दोनों की शादी संपन्न हुई।


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