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Shailaja Bhattad

Abstract Inspirational

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Shailaja Bhattad

Abstract Inspirational

अपनापन

अपनापन

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तीनों भाई एक ही शहर सूरत में रहते जरूर थे लेकिन अलग-अलग रहते थे। साल में तीज-त्योहारों पर भी व्यस्तता के चलते मुश्किल से ही एकत्र हो पाते थे। मेघा बैंगलोर में रहती थी, अतः ज्यादातर वह राखियाँ पोस्ट से ही तीनों भाइयों को अलग-अलग भेजती थी, लेकिन इस बार उसने कुछ अलग करने की सोची। बड़े भाई के घर ही बाकी दो भाई-भाभियों की राखियाँ भी पोस्ट कर दी और फोन पर सूचित कर दिया। इस पर मंझली भाभी ने तंज कसते हुए कहा-"क्या दीदी, आप तो जानती ही है न, हमारा आना-जाना नहीं है; फिर थोड़े से पैसे बचाने के लिए...।"
मेघा ने भाभी को बीच में ही रोकते हुए कहा- "नहीं भाभी, थोड़े से पैसे नहीं बल्कि बड़े रिश्ते बचाने के लिए।"


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