गलत सोच
गलत सोच
गलत सोच- लघुकथा-शैलजा
अपने क्लीनिक में खराब पड़ा गीजर पाँच सौ रुपए में बेचते हुए डॉक्टर ने कहा- "ये लोग बड़े शातिर होते हैं, इसे ठीक करके एक हज़ार में बेचेंगे।"
गीजर ले जाते हुए व्यक्ति को देखकर डॉक्टर ने टिप्पणी की।
"लेकिन इसमें गलत क्या है? डॉक्टर साहब। सभी का पेट है, घर गृहस्थी है और यही छोटा-सा इनका रोजगार है।" आशा के विपरीत अपने मरीज से जवाब सुनकर डॉक्टर अवाक रह गया।
मरीज ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, "पहले तो वह बहुत दूर से पेट्रोल खर्च करके गाड़ी लेकर आया है, फिर इतना वजन ढोकर ले जा रहा है, यानी आपने तो सिर्फ पाँच सौ रुपए में बेचा है और इस पर अपने ज्ञान का उपयोग कर वह इस पर सिर्फ पाँच सौ और कमाएगा। पेट्रोल पर दो सौ रुपए खर्च कर चुका है, यानी सिर्फ तीन सौ रुपए ही कमाएगा वह भी पूरे पाँच घंटे की मेहनत के बाद और अभी तो इसकी भी गारंटी नहीं, कि आपके द्वारा बेचा गया खटारा गीजर ठीक भी होगा या नहीं और इसमें कितने नए पार्ट्स लगाने पड़ेंगे। नए पार्ट्स लगाने के लिए भी उसे पैसे खर्च करने पड़ेंगे यह तो उस पर अत्याचार हुआ न सर?
"अरे इतना भावुक होने की आवश्यकता नहीं है। यह तो उसका काम है।"
आप अपने ज्ञान की कीमत सिर्फ एक घंटे के लिए पंद्रह सौ रुपए आँक रहे हैं और बेचारा यह गरीब अपने पाँच घंटे देकर भी सिर्फ तीन सौ या उससे भी कम कमा रहा है। ऊपर से आप कह रहे हैं, यह बड़े शातिर होते हैं ऐसी क्या चालाकी कर दी इसने? इसका ज्ञान भी तो कम नहीं है न? जैसे वह आपकी तरह दाँत ठीक नहीं कर सकता, वैसे ही आप भी इसकी तरह गीजर ठीक करने की कला में पारंगत नहीं है न? फिर दोनों की मेहनत में इतना फर्क क्यों?" जब थोड़ी देर पहले डाॅ. से फीस कम करने का निवेदन करने पर, डॉक्टर टस-से-मस न हुआ तो मरीज ने एक सांस में अंदर की भड़ास निकाल दी।
