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Shailaja Bhattad

Abstract Inspirational

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Shailaja Bhattad

Abstract Inspirational

मत

मत

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"देखो न मैंने बहुत अच्छी कहानी लिखी है। पढ़ोगी?" "सुना दो, किस विषय पर लिखी है?"

 "तुम्हें तो पता ही है न, मैं समस्याओं पर ही लिखती हूँ।"

 "वह तो ठीक है, लेकिन मैं समस्याएँ सुन-सुनकर बोर हो चुकी हूँ।"

"लेकिन सभी तो समस्याओं पर ही लिखते हैं न?" "समस्या तो सभी देख-सुन रहे हैं। समाचार पत्र भरे पड़े हैं इनसे। इस दिमाग को बीमारी नहीं, टॉनिक चाहिए। स्वस्थ शरीर को पौष्टिक खाना और स्वस्थ मन को सकारात्मक बातें चाहिए। यह क्या लिखा है तुमने, एक लड़की कूड़े में बैठकर घंटों खेल रही थी। इससे कोई संदेश नहीं मिल रहा है।"

"लेकिन मैंने जो देखा, वही लिखा है।"

"समाज ने जो दिखाया, तुम उसका सिर्फ आईना बनी हो, अभी तुमने मार्ग कहाँ दिखाया है? धुंधले होते आईने की चमक को वापस कहाँ लाई हो? हाँ, अगर तुम लिखो, कि तुमने कुछ कदम आगे बढ़कर उसका हाथ थामा था और आज वह आसमान छू रही है। मेरे उसकी ओर बढ़े थोड़े-से कदम उसका जीवन सुधार गए, तो यह पढ़कर सभी का मन मुस्कुराएगा और समाज को प्रेरणा मिलेगी। अभी जो लिखा है, वह सिर्फ समाज को नकारात्मक सोचने के लिए ही प्रेरित कर रहा है। यह समाज के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। समाज ने तुम्हें नकारात्मक दिखाया। तुम्हारा फर्ज बनता है, कि इससे एक स्तर ऊपर उठकर सकारात्मक सोचने के लिए समाज को प्रेरित करो। बाकी जैसा तुम ठीक समझो।"


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