Dr Jogender Singh(jogi)

Abstract


4.5  

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ऐसी बातें नहीं करते

ऐसी बातें नहीं करते

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मोहित पूरे लॉन में उछल कूद कर रहा था ।घर में घुसते ही उसकी नज़र लॉन में पड़े झूले पर पड़ी , “ वाह आंटी इतना बड़ा झूला ? मुझे भी झूलना है , क्या मैं झूल सकता हूँ ।” मोहित ने अधिकार से पूछा। 

महिमा बस मुस्कुरा कर रह गयी । उसको अपने झूले से बहुत लगाव है । पर उसकी सबसे प्यारी सहेली अनुराधा के पोते मोहित को चाह कर भी मना नहीं कर पाई ।

अनुराधा अच्छी तरह से जानती थी कि महिमा झूले और लॉन को लेकर कितनी पज़ेसिव है , फिर भी मोहित से बस इतना बोल पाई “ सम्भाल कर बेटा । ” शायद मूल से ब्याज प्यारा सभी को होता है ।

मैं ध्यान से झुलूँगा दादी । मोहित झूले को आगे ले जाते हुए बोला ।

झूले की आवाज़ कानों में चुभ तो नहीं रही है , पर ख़ास अच्छी भी नहीं लग रही है । 

“ और बताओ माही ? कैसा चल रहा है ? अनुराधा बरामदे में पड़ी बेंत की कुर्सी पर बैठते हुए बोली । “ आह ! न चाहते हुए भी अनुराधा के मुँह से निकल गया , यह मुआ घुटना तो मेरी जान ले कर रहेगा । 

“ कोई दवाई क्यों नहीं लेती तू ? महिमा ने काँच की मेज़ को दूर सरकाया “ टाँग फैला ले , आराम मिलेगा । 

दवाई ली तो थी पूरे तीन महीने खाई , वही बनर्जी डॉक्टर , कहने को तो शहर का इतना बड़ा डॉक्टर ,पर दर्द की चार दवा दे दी इकट्ठी फिर भी एक पैसे का आराम नहीं । मनु की ज़िद्द थी , किसी तरह तीन महीने खा ली , फिर बंद कर दी , गैस और बनने लगी । 

अंग्रेज़ी दवा गर्म तो होती है , तू दत्ता को क्यों नहीं दिखा लेती , वो घुटना बदलने का ऑपरेशन भी बढ़िया करता है , मेहरोत्रा जी के दोनो घुटने डॉक्टर दत्ता ने ही बदले हैं , अब सुबह / शाम आराम से टहलते हैं ।

"दादी मैं फ़व्वारा चला दूँ !" मोहित ने आवाज़ लगाई । 

"दादी से पूछ ले बेटा , स्विच किधर है ।" अनुराधा ने टालने के लिए बोला ।

"मुझे पता है , ढूँढ लिया है मैंने ।" मोहित ने फ़व्वारा चला दिया । बूँद दो बूँद पानी हवा के साथ महिमा और अनुराधा पर भी पड़ने लगा ।

"घुटना कौन बदलवाएगा ? शिवानी याद है तुम्हें" , लाजपत नगर वाले सोमप्रकाश मौसा जी की लड़की , अनुराधा ने महिमा के चेहरे के भाव देख कर याद दिलाने की कोशिश की “ वही जिसकी शादी इंदिरा नगर के सन्देश के साथ हुई थी , चक्की वाला सन्देश । 

"हाँ , हाँ ! याद आया अवंतिका मौसी की लड़की । महिमा की आवाज़ में जोश था । क्यों क्या हुआ उसे ? वो तो हम लोगों से दस / बारह साल छोटी है ।"

"पंद्रह साल छोटी है तुमसे , घुटना बदलवाया था दिल्ली में , दो बार ऑपरेशन हुआ एक बार दिल्ली में एक बार मुंबई में , पैर ख़राब हो गया बेचारी का । ऑपरेशन मैं नहीं करवाऊँगी , अब निष्कर्ष डॉक्टर की दवा खा रही हूँ पंद्रह दिन से , सूजन में कुछ आराम है ।" अनुराधा ने अपनी "साड़ी ऊपर उठा कर दायाँ घुटना दिखाया , “ देख लाली और सूजन दोनो कम हो गए ।” 

"निष्कर्ष कौन , नया हड्डी का डॉक्टर है क्या" ? 

"नहीं रे , नया लड़का है होमोंपेथी कि दवा देता है , हमारे मौहल्ले में क्लिनिक खोला है । कह रहा था माता जी आप को एकदम ठीक कर दूँगा , छः महीने में । आराम तो है , यश है लड़के के हाथ में ।और फ़ीस कुल पचास रुपये , दवाई मिला कर एक हफ़्ते के तीन सौ तीस रुपए । “ चाय पीने का मन कर रहा है ” अनुराधा ने जम्हाई ली ।

"सुधा आती ही होगी ,लो आ गयी । महिमा ने सुधा को आते हुए देख कर बोला । “ सुधा तीन कप चाय बना ले पहले ,और मोहित को फ़्रीज़ से फ़्रूटी दे दे ।” बाक़ी काम बाद में कर लेना । 

"माही ब्रेड भी सिकवा ले" , अनुराधा ने सुधा को सुनाते हुए बोला ।

"ब्रेड भी सेंक लेना सुधा ।"

"जी माँ जी । " सुधा बड़बड़ाई आ गयी खाऊ बुड्डी , पता नहीं माँ जी की कैसी सहेली है , भुक्कड़ कहीं की , "सुधा ब्रेड सेंक दो , सुधा पकौड़े बना दो । किसी दिन इसी को सेंक दूँगी ।" 

क्या बोल रही हैं आंटी ? सुधा को पता ही नहीं चला कि मोहित कब रसोई में आ गया ।

"कुछ भी तो नहीं बेटा । क्या चाहिये आपको ?"

"पानी दे दीजिये आँटी । प्यास लग गयी झूला झूलते / झूलते ।" 

"यह लो बाबा" , सुधा ने मोहित को पानी का गिलास दिया । 

"गरम है ", मोहित ने गिलास सुधा को वापिस कर दिया । 

"ठंडा पानी पीने से गला ख़राब हो जायेगा , यही पी लो ।" 

"थोड़ा सा ठंडा मिला दीजिए चुपके से" , मोहित ने अनुनय की ।

आपकी दादी को बताना पड़ेगा । 

"फिर तो आँटी आप जो बोल रही थी , वो मुझे भी बताना पड़ेगा ।" मोहित शरारत से मुस्कुराया । 

"बदमाश ! यह ले ठंडा पानी और सुन “ ऐसी बातें नहीं करते , राजा बेटा ।” 

"जी आंटी , ऐसी बातें नहीं करते । थैंक यू ।" मोहित गिलास सुधा को पकड़ाते हुए बोला । 


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