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Kajal Manek

Abstract


4.0  

Kajal Manek

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अधूरा चाँद

अधूरा चाँद

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आज आसमान में चाँद को अपलक निहार रहा था अजय, अनायास ही उसे नैना की बातें याद आ गईं।हालांकि अब सोनल से शादी होने के बाद न नैना उससे बात करती थी न वो नैना से और शायद सही भी यही था।

लेकिन अजय को याद आया उसका पहला प्यार नैना जो जब भी उससे मिलती कहती देखो अजय चाँद को कितना अच्छा लगता है। अजय कहता मुझे ये सब पसन्द नहीं ये फालतू की बातें हैं। नैना और अजय एक दूसरे को प्यार तो बहुत करते थे लेकिन अजय का अक्खड़ स्वभाव ही था जो अक्सर उनके बीच झगड़े की वजह बनता।

नैना जब भी अजय से कहती मुझे घूमने ले चलो, वो कहता फालतू वक़्त नहीं है मेरे पास, न अजय के पास बात करने का वक़्त होता न मिलने का। उस पर तो जैसे भूत सवार था पैसा कमाने का और तरक्की का, उसे लगता कि नैना तो मुझसे ही शादी करेगी क्योंकि मुझसे बात किये बिना वो रोने लगती है मेरे बिना कैसे रहेगी।

नैना अपनी तरफ से हर कोशिश करती कभी अजय की पसन्द का खाना बनाकर तो कभी उसकी पसन्द के रंग के कपड़े पहनकर की शायद अजय खुश हो जाये और बाकी की जोड़ियों की तरह वे भी घूमे,एक दूजे के साथ वक़्त बिताएं एक दूसरे की परवाह करें।

लेकिन हर बार नैना को बस अश्रु ही मिलते वो जानती थी कि अजय के अलावा अब उसके जीवन मे कोई नहीं आ सकता, लेकिन वो कब तक यूं अस्तित्व विहीन होकर रहती।


अजय के स्वभाव की वजह से ही वो दोनों अलग हुए थे, परिवार के दबाव और गुस्से में अजय ने सोनल से शादी कर ली। पर नैना ने शादी नहीं कि उसका सच्चा प्यार जो था वो, भला कैसे वो किसी दूसरे इंसान को वो जगह दे पाती इतना आसान नहीं था उसके लिये।


आज चाँद को देख अजय को वो बातें याद आ गयी, वह सोच में पड़ गया नैना के बिना तो ये चाँद अधूरा लगता है, उसने कभी नहीं सोचा था कि वो भी चाँद को ऐसे देखेगा जैसे कभी नैना देखा करती थी।उसने सोचा काश उस वक़्त थोड़ा वक़्त थोड़ी परवाह नैना को दी होती, काश पैसों के पीछे न भागा होता तो जीवन सच्चे प्यार के साथ बिताने का अवसर मिलता।शायद अनजाने में मैंने सोनल के साथ भी गलत किया है।

लेकिन अब तो समय बीत चुका था, वो अजय जो कभी अक्खड़ और अड़ियल था आज नैना की कमी उसे इतनी खल रही थी कि उसे वो पूर्णिमा का चाँद भी अधूरा लग रहा था। जब भी चाँद को देखता उसे उसकी ज़िन्दगी के अधूरेपन का अहसास होता क्योंकि वो चाँद उसे उसके सच्चे प्यार के बिना अधूरा लगता था।


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