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Sushil Pandey

Abstract


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Sushil Pandey

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आपकी दूरदृष्टिता को प्रणाम

आपकी दूरदृष्टिता को प्रणाम

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मै पूछता हूं जो तुमसे,तुम बताना गर आता है,

ज़ख्म क्या वाकई, वक्त के साथ भर जाता है ?

नही लगता मुझे श्रीमान् कि वक्त भर पायेगा इन ज़ख़्मों को क्योंकि वक्त ने ही दर्द दिये हैं ये, पिछले एक-सवा सालों में।

मुझे नही पता कि गलती किसकी ज्यादा है देश के निरीह जनता की या सरकारों की वैसे...

कोई तो जुर्म किया है सभी ने मिलकर !

तभी तो सभी को मुंह छुपाना पड़ रहा है !

पिछले वर्ष का याद होगा आपको कोरोना संक्रमण विस्फोट का मटका हमने तबलीगी जमात के सर फोड़ दिया था इस बार ये मटकी किसके सर पटकें श्रीमान ?

क्या ठीक होगा कुंभ के लिए उत्तम प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी और पांच प्रदेश के चुनावों के लिए आपका नाम लेना ? कहीं मै देश द्रोही तो करार नही दे दिया जाऊंगा सर ?

या कहीं मै भी तो मुस्लिम नही बना दिया जाऊँगा राहुल गांधी जी की तरह ?

सर अभी कल परसो ही तो भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पत्रकार सम्मलेन में जो सूचनाएं दी हैं वो पीएमओ ने लिख के भेजी थी उन्हें,या गलत बयानी का उनका अपना निर्णय था श्रीमान। 

उनके अनुसार देश में 488861 लोग ICU में भर्ती हैं जबकि देशभर के सारे निजी और सरकारी अस्पतालों को जोड़ दें तो कुल 1 लाख भी ICU Bed नहीं हैं। 

170841 लोग वेंटीलेटर पर है जबकि देशभर के सारे वेंटिलेटर्स को जोड़ दें वो भी जो PM केयर फण्ड से आर्डर दिए गए है उनकी संख्या को मिलाकर भी कुल 1 लाख के आस पास ही वेंटीलेटर उपलब्ध हैं देश भर में। 

902291 लोग आक्सीजन पर जीवित हैं जबकि देश के उपयोगी और अनुपयोगी सारे आक्सीजन सिलेंडर की संख्या 7 लाख से भी कम है।

ये तो ऐसे आंकड़े बता रहे थे जैसे आप विभिन्न राज्यों पैकेजेज की घोषणा करते हैं, याद है आपको पिछले 7 वर्षों में कितने लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा कर दिया है आपने ? नहीं होगा सर आपको, मैं याद दिलाता हुं करीब करीब 40 लाख करोड़ का ऐलान जिसमे सबसे ज्यादा दिया आपने कोरोना काल में संकट से उबरने के लिए, उसके बाद सबसे बड़ी घोषणा आपने बिहार के लिए सवा लाख करोड़ का किया था, उसमे से कितना दिया अब तक बिहार को कुल 27 हजार करोड़, कहाँ गया बाकि 1 लाख करोड़। 

कुछ सोचते हैं आप घोषणा करने से पहले या नही, आपको शायद नहीं पता होगा देश का हर गरीब अपनी लाचार नजरों से देखते हुये सूखे कंठों से आप को गुहार लगाता है, मदद की भीख मांगता है आपसे, परिजनों को मरते हुए अपनी आँखों से नहीं देखा जाता सर। 

आप की चुप्पी बहूत टीसती है मन को कुछ बोलिये महाराज, कुछ तो बोलिये प्रभु, कहाँ है वो पिछले साल वाले संसार भर के रहबर जिनको मदद पहुँचाकर आप भारत का नाम संसार के सर्वश्रेष्ठ देशो की सूची में लिखवा रहे थे क्यों नहीं कर रहा है कोई आपकी तारीफ अब,आपकी दूरदृष्टि का बखान करते नहीं थक रहे थे कहाँ है वो भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्तागण क्या हो गया है उन सबको। 

पिछले वर्ष दुनिया के सभी देशो की मदद करने वाले इस देश को क्या हो गया है जो खुद की समस्याओं से भी नहीं उबार पा रहा है खुद को।

एक बात बताऊँ श्रीमान हालाँकि मैं इतना लायक तो नहीं हूँ की आपको सलाह दे सकूँ पर फिर भी नागरिक तो हूँ ही मैं इस देश का क्यों की मेरे माता-पिता और मेरा सबका जन्म प्रमाण पत्र है मेरे पास और वो भी सरकार द्वारा दिया गया है तो इस नाते मेरा हक़ तो बनता है आप माने या ना माने वो आपकी मर्जी, कभी सोचियेगा पिछले 7-8 वर्षों में क्या कमाया आपने ? देखिएगा निश्चित-तौर पर आपके हाथ नुक्सान ही लगेगा, कुछ फायदे का सौदा नहीं रहा है गत 7-8 वर्षों मे। 

झूठ का जो कुतुबमीनार खड़ा किया था आपने, ढहने लगा है वो ताजमहल श्रीमान, रोकिये बचाइए गिरने से ताश के पत्तों पर खड़े उस विशाल साम्राज्य को प्रभू।

बनी हुई जब दवा है उसकी, देने मे फिर मुश्किल क्यों है ?

कर सकते हो ठीक समस्या, करने मे फिर देरी क्यों है ?

कठिनाई मे हार गये और, दिक्कत के न पार गये गर,

फिर कहां गई वो नाप तुम्हारी, छप्पन इंची सीना क्यों है ?


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