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Sushil Pandey

Tragedy


4.2  

Sushil Pandey

Tragedy


तो कभी फटकारों की बारी है !

तो कभी फटकारों की बारी है !

3 mins 312 3 mins 312

ख़त्म नहीं होती हैं यादें, क्यों आना उनका जारी हैं !

कभी तेरे दुलारों की तो, कभी फटकारों की बारी है !

आज पुराना अल्बम देखते हुए तुम्हारी एक पुरानी तस्वीर दिखी, उसको देखते हुए मै पुराने समय में ही मै चला गया था माँ जब तुम थी, तुम्हारी सारी बातें पुरानी फिल्मो की तरह गुजरने लगी नजर के सामने से सच मै बहुत रोमांचित हो गया था तुमको दुबारा मिल के। 

तुम्हारा मुझपे नाराज होना डांटना-पीटना सब याद आने लगा, मेरे सिरदर्द होने पर बिना कहे ही मेरा सर दबाना तेल मालिश करना सब माँ सब याद आने लगा, तुम्हारे रहते हुए तुम्हारे बिना संसार की कल्पना ही नहीं की थी, जबकि मै इस बात से बिलकुल वाकिफ था की मृत्यु सुनिश्चित है वो सबकी होनी है, फिर भी इसकी कल्पना नहीं की थी कभी, पता नहीं क्यों? या फिर मन में कुछ शंका सी थी की सबकी माँ मर सकती है पर मेरी नहीं और ये हर बच्चे को लगता है शायद?

कैसे सूबह तुम्हारे फ़ोन के साथ ही नींद खुलती थी और रात तुम्हारे फ़ोन के बाद ही नींद आती थी अब भी तो हो ही रहा है सबेरा और सो भी रहा हूँ मै रातों को, पर होने वाली हर सूबह पता नहीं क्यों इस बात का एहसास दिलाना नहीं भूलती की अब तुम नहीं हो माँ। 

सुना है किसी को शिद्दत से चाहो तो सारी कायनात उससे मिलाने की जुगत करती है और मैंने तो ये भी 

सुना है इस जहाँ के इतर भी एक जहाँ है माँ !

वहीँ मिलूंगा मै तुझसे बस याद रखना मुझे !!

तुम्हारी सुनाई "शीत-बसंत" कहानियां अब मै भी बाबू को सुनाता हूँ कभी-कभी, तुम्हारा मुझे सुनाते हुए सो जाना और फिर कैसे मै धक्का दे देकर जगाता था तुम्हे मेरे सो जाने तक, सब याद आता है माँ सब। 

कहानियां सुनाते सुनाते मुझे पहाड़े याद कराना अब बहुत तकलीफ देता है बहुत तकलीफ देता है। क्या ऐसा नहीं हो सकता की मै मिल सकूँ तुमसे दुबारा, क्यों नहीं है कोई रास्ता माँ, याद है कैसे गांव के आँगन में सोते हुए आकाश में टिमटिमाते जुगनुओं में तुम मुझे "बाबा-आजी" से मिलवाती थी तो मै क्यों नहीं मिल सकता तुमसे माँ ?

तुम्हारा जाना मुझे इस कायनात में अकेला छोड़ जाने जैसा था, तुमने रंग रंग के शख्स देखे होंगे जहाँ में पर मैंने तो तुममे ही सब रंग देखे थे माँ, हर कामयाबी को तुमसे साझा किया और हर दुःख तुम्हारी गोद में सर रख रोकर ही तो हल्का किया था मैंने। 

तुम्हारा कहना की मेरे मरने के बाद पता चलेगा तुम्हे, अब सच में पता चल रहा है मुझे, पर क्या करूँ कोई तरीका भी तो नहीं है शेष तुमसे मिलने का दुबारा अगर हो तुम्हे पता तो बताओ सच माँ मै बेहिचक निकल पडूंगा उस रास्ते। 

तुम्हारे रहते किसी की मौत ने मुझे इतना दुखी नहीं किया था कभी पर अब हर मौत क्यों तुम्हारी कमी का बोध कराती है मुझे?

सच में मै इन्तजार में हूँ अब भी

नहीं हुईं हैं ख़त्म बाकि दस्तूरें अभी सारी हैं, 

भले न चाहे तू पर मातम अब भी जारी है !

पहले तूने किया था एक बार मेरा लेकिन

तेरे इन्तजार की अब मेरी बारी है !


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