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Arunima Bahadur

Action

4  

Arunima Bahadur

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युद्ध

युद्ध

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चल रहा एक युद्ध है।

हर मार्ग अवरूद्ध है।।

जन जन भी क्रुद्ध है।

राह कहां अनिरुद्ध है।।


रो रही आज मानवता,

विचार भी अशुद्ध है।

भूली प्रेम परिभाषाएं,

कब कोई विशुद्ध है।।


ललसाए बड़ी चढ़ी,

मानवता के विरुद्ध है।

एक दूजे नाश कर,

कब कोई शुद्ध है।।


कौन सा साम्राज्य भला,

कितना आज शुद्ध है।

देख दूजे की खुशी,

हुआ आचरण अशुद्ध है।।


हर मानव के मन में,

चलता नित एक युद्ध है।

जीत सका जो खुद को,

वही तो यहां शुद्ध है।।



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