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Lakshman Jha

Action


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Lakshman Jha

Action


भंगिमा

भंगिमा

1 min 20 1 min 20

क्यों मैं मौन स्तब्ध निरंतर रह -रह कर अपनी

व्यथा के परिधियों में आवाध भ्रमण करता हूँ ?

शांत निशब्द प्रतिक्रिया रहित मुक दर्शक

किंकर्तव्यविमूढ़अकर्मण्यता के लिबासों में लिपटा रहता हूँ ?


मैं भी हूँ गाण्डीवधारी धनुर्धर प्रशिक्षित प्रहार करके 

लक्ष्य भेदना मैं कुशलता से जानता हूँ !

किस समय, किस पहर, किस स्थान पर

गरम लोहे पर प्रहार करना जानता हूँ !


मैं नहीं सिर्फ तस्वीरों के फ्रेमों में चिपक कर 

सारी गतिविधिओं को देखकर जमाहियाँ लेता हूँ !

छुप के नहीं दुबक के नहीं आक्रांताओं के प्रतिकारों को

अपनी क्षमता से मुंहतोड़ जवाब देता हूँ !


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