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Sanskriti Kumari

Action Classics Inspirational

4.7  

Sanskriti Kumari

Action Classics Inspirational

वास्तविकता

वास्तविकता

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388


कब जलता है बिन हवाओं के दिया 

हवायें चाहे लाख बुझाए उसे

कब जीता है बिन रिश्तों के आदमी 

रिश्तें चाहे लाख आजमाये उसे 


कब जरूरी है बिन अँधेरों के रोशनी 

अंधेरा चाहे लाख दबाए उसे 

कब हुई है पावन बिन आँसूओं के आँखें 

आँसू चाहे लाख रुलाये उसे 


कब हुआ है कुन्दन बिन आग के सोना 

आग चाहे लाख तपाए उसे

कब बना है मशहूर बिन ठोकरों के इंसा 

ठोकरें चाहे लाख गिराये उसे


कब चखा है किसी ने बिन ग़म के खुशी

ग़म चाहे लाख सताए उसे 

कब मुकम्मल है बिन मौत के जिंदगी 

मौत चाहे लाख डराये उसे।


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