Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Sanskriti Kumari

Abstract Inspirational

4.8  

Sanskriti Kumari

Abstract Inspirational

हौसला

हौसला

1 min
833


किस्मत की कोई तू बात मत कर 

हाथों की लकीरों में क्या रखा है 

बंद नहीं मुट्ठी की रेखाओं में वरना

बिना हाथ वालों का तकदीर कहाँ रखा है 


बुझा जो दिया दोष नहीं आँधियों का

इन हवाओं ने ही बाती जला रखा है

रास्ते के मुश्किलों को कोसना कैसा 

इन परेशानियों ने हौसला जागा रखा है 


घूमता है काबा काशी तलाश में उसके

क्या तूने रूह में भी ईश्वर बसा रखा है 

इंसानियत की इबादत कर के देख बन्दे 

क्यूँ पत्थर पूज के ख़ुदा बना रखा है


मत सोच अकेला नहीं कर सकता कुछ तू 

देख जुगनुओं ने तन्हा ही अंधेरा मिटा रखा है 

वो समझे साथ चले काफिला हर मुकाम तक

जिसने हवाओं में ताश का महल बना रखा है 

 

चंद तारे ही तो टूटे हैं सपनों की आसमान से 

किस लिए एक हार पे अपना सर झुका रखा है 

समेट हिम्मत चल दे नये मंज़िल की ख़ातिर 

अभी तो जीतने को पूरा ख्वाबों का जहां रखा है 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract