ये कैसा वर्तमान है
ये कैसा वर्तमान है
खतरे में ईमान है
ये कैसा वर्तमान है
वही करता है गर्भपात
जो इन्सान बेईमान है
अभी देखा नहीं
इस सुन्दर जग को
न सोच बनी
समृद्ध मेरी
झंझोड गया मेरा
अन्तर्मन
ऐसा क्या पाप हुआ
क्या गलती रही
जो कुचल दिया
मेरे पंखों को
अभी उड़ना सीखा
कहां था मैंने
न चीख हुई
न पता चला
खत्म हुआ सब
खत्म हुआ
वाह रे मानव
ये कैसी तेरी शान है
ये कैसा वर्तमान है।।

