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Paramjeet Singh

Romance

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Paramjeet Singh

Romance

ये कैसा वर्तमान है

ये कैसा वर्तमान है

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खतरे में ईमान है

ये कैसा वर्तमान है

वही करता है गर्भपात

जो इन्सान बेईमान है

अभी देखा नहीं

इस सुन्दर जग को

न सोच बनी

समृद्ध मेरी 

झंझोड गया मेरा

अन्तर्मन

ऐसा क्या पाप हुआ

क्या गलती रही

जो कुचल दिया 

मेरे पंखों को

अभी उड़ना सीखा 

कहां था मैंने

न चीख हुई

न पता चला

खत्म हुआ सब 

खत्म हुआ

वाह रे मानव 

ये कैसी तेरी शान है

ये कैसा वर्तमान है।।

      


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