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Paramjeet Singh

Abstract

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Paramjeet Singh

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हंसी की बात

हंसी की बात

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आज सुनो तुम गाथा ये

बात हंसी की हुई एक दिन

खड़ा दुकान पर भुजिया लेने

लिया पैकेट हाथ में थाम


लाला जी ने मांगे दाम

डाला जेब में हाथ तभी

कुछ न आया हाथ तभी

देखा तब तो जेब फटी


हल्का सा मुस्कुराकर मैंने

वापिस किया भुजिए का पैकेट

मैंने बोला लाला भाई माफ़ करो

नहीं जेब में छुट्टे पैसे

हिसाब किताब तुम साफ करो।


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