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Paramjeet Singh

Others

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Paramjeet Singh

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ऐसा ही हूं मैं

ऐसा ही हूं मैं

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मैं सच कहता हूं

संभल संभल कर

चलता हूं जीवन में

बात पते की करता हूं

पर कुछ मेरे अपने हैं

जिनसे जुड़े मेरे सपने हैं

मेरा सीना छलनी करते वो

अन्दर ही जलते मरते वो

मैं व्याकुल, कुंठित, मौन,

झेलता चुभते हुए कांटों को

इक वादा सुन लो

मेरा तुम

चीख नहीं निकलेगी

न नीर बहेगा आंखों से

है समर्पण मेरा इतना ही।।


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