ऐसा ही हूं मैं
ऐसा ही हूं मैं
1 min
270
मैं सच कहता हूं
संभल संभल कर
चलता हूं जीवन में
बात पते की करता हूं
पर कुछ मेरे अपने हैं
जिनसे जुड़े मेरे सपने हैं
मेरा सीना छलनी करते वो
अन्दर ही जलते मरते वो
मैं व्याकुल, कुंठित, मौन,
झेलता चुभते हुए कांटों को
इक वादा सुन लो
मेरा तुम
चीख नहीं निकलेगी
न नीर बहेगा आंखों से
है समर्पण मेरा इतना ही।।
