STORYMIRROR

Rajeev Tripathi

Abstract

4  

Rajeev Tripathi

Abstract

नारी

नारी

1 min
331

नारी चंचल होती है

नारी पुरुष का सम्बल होती है

नारी पुत्र और पुत्री को 

जन्म देने वाली

पुरुष के सम्मुख खड़ी होती है


एक नारी को ही मातृत्व का

बोध होता है

एक नारी सृष्टि की तरह होती है 

नारी पुरुष से श्रेष्ठ और रत्नों से

जड़ी होती है


मुसीबत के वक्त नारी पुरुष की

आदि शक्ति होती है

उदारता प्रेम समर्पण

नारी में अद्भुत शक्ति होती है


बेटी मांँ पत्नी दादी नानी

नारी सब रिश्तो में बड़ी होती है 

नारी के बारे में और क्या कहें

नारी स्वयं पहेली होती है


पुरुष अगर नारी की तरह

सोचने लग जाए तो

नारी के प्रति हो रहे अत्याचार

में भी कमी होती है


नारी प्रेम और वात्सल्य से

बनी होती है

पुरुष बीज की तरह होता है

नारी उर्वरा भूमि की तरह है होती है 

नारी स्वयं में पूरा परिवार है


सबको वह जोड़े रखती है

नारी नर से सदैव श्रेष्ठ होती है

नारी चंचल होती है

नारी पुरुष का सम्बल होती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract