STORYMIRROR

Rajeev Tripathi

Inspirational

4  

Rajeev Tripathi

Inspirational

उपेक्षा

उपेक्षा

1 min
183

किसी को उपेक्षित करना ठीक नहीं

उपेक्षा हीं से हमारे ख़िलाफ़ 

इक आवाज़ उठती है

इसके साथ-साथ कई लोग हमारे

विरोध में उठ खड़े होते हैं


विरोध में मनाने की गुंजाइश

ज़रा कम होती है 

सभी व्यक्ति तो हमारे अनुकूल नहीं हो सकते

फ़िर उपेक्षा की आवाज़ उठती है


किसकी बात माने और किस की छोड़ दें 

रूठने मनाने की आजमाइश होती है 

हर समस्या का समाधान समूह में

चल रहे द्वंद और समस्या के समाधान से

जुड़ा होता है


व्यक्ति का समूह जब समस्या को

लेकर आगे बढ़ता है

तो उसकी भी कोई मजबूरी होती है 

अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना

कभी बुरा नहीं होता


अपने अधिकारों के लिए लड़ना

यह आदत कहाँ बुरी होती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational