STORYMIRROR

Dr Manisha Sharma

Drama

3  

Dr Manisha Sharma

Drama

ये और वो

ये और वो

1 min
231

मानो या ना मानो 

कुर्सी में बहुत जान है

बैठ गया जो उसपर

अकड़ उसकी पहचान है


मानो या ना मानो 

झूठा यहाँ राजा है

हर हरिश्चंद्र का 

बजा यहाँ बाजा है


मानो या ना मानो

सब पहने मुखौटे

बाहर कुछ भीतर कुछ

बड़े हो या छोटे


मानो या ना मानो 

बेटी है अनमोल

रंग रूप और पैसे से

तू मत उसको तोल


मानो या ना मानो

जीवन एक पहेली

ज़िन्दगी कभी दुश्मन सी

कभी प्यारी सहेली


मानो या ना मानो

रुपयों के हैं पाँव

नाच नचाये सबको 

शहर रहो या गाँव।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama