STORYMIRROR

Dr Manisha Sharma

Abstract

3  

Dr Manisha Sharma

Abstract

तिजोरी

तिजोरी

1 min
180

मैंने चाहा तुमसे

मुट्ठी भर प्यार और तिनका सा सम्मान

और जीवन भर रीती रही मैं

और कोसती रही ताउम्र 


कभी ख़ुद को 

कभी तुम्हें 

कभी अपनी लकीरों को 

भूल मेरी थी


तुम्हारी तिजोरी में जगह ही कहाँ थी इनके लिए

जो था तुम्हारे पास 

वो सब तो दिया ही ना तुमने मुझे.....


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract