याद
याद
ज़िन्दगी कहां रुकती है.
चलती ही रहती है.
तुम्हारे साथ भी चल रही थी.
तुम्हारे बाद भी चल रही है.
बस फर्क़ इतना है.
तब हम ज़िन्दगी जी रहे थे.
अब बस इक उम्र कट रही है.
अब न वो सुबह होती है.
न अब वो शाम आती है.
सूनी सूनी है ज़िन्दगी.
सूना हर नज़ारा है.
कैसे समझाऊँ तुम्हे .
कैसे बतलाऊँ.
कैसे यक़ीन दिलाऊँ.
बहुत याद आते हो तुम..!!

