STORYMIRROR

Sangeeta Ashok Kothari

Tragedy

4  

Sangeeta Ashok Kothari

Tragedy

वो सूखा गुलाब और तेरी यादें "

वो सूखा गुलाब और तेरी यादें "

1 min
282

तेरी यादों में खो जाना अब रोज की दिनचर्या हो गयी, 

यादों में बहते अश्कों से तकिये पर रंगोली हो गयी,

चलचित्र से चलते दृश्यों से आँखें गमगीन हो गयी,

तेरी यादों में खोये जाने कब रात से सुबह हो गयी,

सामने गुलाब का पौधा देख उनींदी आँखें सजग हो गयी,

तेरा दिया सहेजकर रखा वो गुलाब मैंने आज भी,

जो मुरझा गया पर है उसमें तुम्हारी महक आज भी,

वो सूखा गुलाब और तेरी यादें मुझे बेचैन कर देती,

जो पैरों तले रौन्दे गुलाब वो ज़माना क्या समझेगा मोहब्बत मेरी।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy