वो सूखा गुलाब और तेरी यादें "
वो सूखा गुलाब और तेरी यादें "
तेरी यादों में खो जाना अब रोज की दिनचर्या हो गयी,
यादों में बहते अश्कों से तकिये पर रंगोली हो गयी,
चलचित्र से चलते दृश्यों से आँखें गमगीन हो गयी,
तेरी यादों में खोये जाने कब रात से सुबह हो गयी,
सामने गुलाब का पौधा देख उनींदी आँखें सजग हो गयी,
तेरा दिया सहेजकर रखा वो गुलाब मैंने आज भी,
जो मुरझा गया पर है उसमें तुम्हारी महक आज भी,
वो सूखा गुलाब और तेरी यादें मुझे बेचैन कर देती,
जो पैरों तले रौन्दे गुलाब वो ज़माना क्या समझेगा मोहब्बत मेरी।।
