STORYMIRROR

Taj Mohammad

Abstract Romance Tragedy

4  

Taj Mohammad

Abstract Romance Tragedy

खुद को मिटा बैठे हैं।

खुद को मिटा बैठे हैं।

1 min
319

कुछ तो खास है उसमें,

यूं ही नहीं हम खुद को मिटा बैठे हैं।।

है तसव्वुर या हकीकत,

जानें किस से हम दिल लगा बैठे है।।


कातिल अदाएं उनकी,

हम अपने दिल ओ जां गवां बैठे है।।

बर्बादी का मंजर देखो,

इश्क में हम सब कुछ लुटा बैठे है।।


कल तक थे वो पत्थर,

आज खुद को जो खुदा बना बैठे हैं।।

उन्हें बद्दुआ कैसे दे दें,

जो मेरे लबों पे बन के दुआ बैठे है।।


जाम लेकर कोई आए,

हम मैखाने में कब से तन्हा बैठे हैं।।

मेरे हंसने पर ना जाना,

दर्दों को हम सीने में छुपा लेते हैं।।


हम दूर ही अच्छे उनसे,

जो अफवाहों को बस हवा देते हैं।।

उनसे अल्लाह बचाए,

जो पीठ पीछे खंजर चला देते है।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract