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Shahwaiz Khan

Romance Tragedy Classics

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Shahwaiz Khan

Romance Tragedy Classics

वो शाम

वो शाम

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आज भी याद है

वो सर्द शाम

जब उसने मेरे हाथ

अपने हाथों में लेकर कहा था

तुम्हारी हथेलियाँ बहुत गर्म है

और ये वफ़ादार लोगो की निशानी है

मैं आज सोचता हूं

उस शाम उसकी हथेलियाँ इतनी सर्द क्यूँ थी


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