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Ganesh Chandra kestwal

Romance Inspirational Others

4.5  

Ganesh Chandra kestwal

Romance Inspirational Others

वनिता

वनिता

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सहधर्म चारिणी, हृदय विहारिणी,

संतति दायिनी, नेह प्रसारिणी। 

हृदय निनादिनी, जीवन में बहु मोद दायिनी। 

विनोद कारिणी, वनिता जग में सौख्य दायिनी।।

मुदिता वनिता कार्य साधिनी, 

कार्यों में नित विघ्न हारिणी। 

संतति की वह ज्ञान प्रदायिनी,

ज्ञान विभा से तम की नाशिनी।।

शक्ति धारिणी शक्ति प्रदायिनी, 

काली रूप में काल नाशिनी ।

कर्म साधिनी दुर्गति हारिणी, 

दुर्गम मग पर शील धारिणी।।

भोग्या नहीं वनिता भूमि पर,

मानित होती श्लाघ्य कर्म कर।

हे नर! तू भी नित्य मान कर, 

वनिता संग तू चरण मार्ग धर।।

रचयिता-

गणेश चन्द्र केष्टवाल


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