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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational Others

4.5  

Ganesh Chandra kestwal

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महिला

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प्रसन्नता बहुत बड़ी, नारी सशक्त हो रही।

स्वर्णिम भविष्य बीज को, नारी सशक्त बो रही।

समस्त दुःख अरु व्यथा, नारी सशक्त खो रही।

अशेष देश विश्व में, जयकार नित्य हो रही॥१॥


नारी धरा विशेष है, सुरत्न जन्म दे रही। 

नारी प्रदत्त शक्ति से, सुवेग सृष्टि ले रही। 

नारी विशिष्ट कामना, उन्नति सदा बढ़ा रही।

उसकी विशेष भावना, महा शिखर चढ़ा रही॥२॥


लेकिन सशक्त यौवना, निज मार्ग कुछ भुला रही।

निसर्ग की धुरी विशेष, वही तो है हिला रही।

वासना में पड़ कई तो, मृण अस्मिता मिला रही।

अनीति पाठशाला को, नारी कहीं चला रही॥३॥


'प्रखर' नमन है नारियों को, निज धर्म पर है डट रही।

अनेक कष्ट झेलकर, स्वकर्म पर है मिट रही।

नमन पुनः पुनः उन्हें, विशेष गुरु सिखा रही।

स्वयं जले सुदीप सा,  सुमार्ग नित दिखा रही॥४॥

-गणेश चन्द्र केष्टवाल 'प्रखर' 


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