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Gajanan Pandey

Fantasy

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Gajanan Pandey

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वंदना

वंदना

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हे दीनों के नाथ

पालनहार तुम्हीं हो उनके।

शीत,ग्रीष्म, वर्षा में

घनघोर अंधेरे में

भीतर व बाहर के तम से

त्राण दिलाओ

हे ! परमेश्वर

न कोई हो भूखा - नंगा

घोर दरिद्रता का जीवन

कोई क्यों जिए ?

हे ईश्वर !

दो सबको आस व साहस

काट हर बंधन को

सब सुख पाएं, इस जीवन में।



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