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ज्योति किरण

Drama

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ज्योति किरण

Drama

वक्त का तकाजा

वक्त का तकाजा

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वक्त का तक़ाज़ा है,

और ख़्वाहिशों की आंधी है।

सुख और दुख को सहेजा है,

रिश्तों की पोटली बांधी है।


खट्टे-मीठे नातों से ही,

घर-आंगन मुस्काता है।

नोक-झोंक से गूंजे हरदम

सन्नाटा नहीं भाता है।


कनक समान है साथ सभी का,

पावन जैसे चांदी है।

सुख और दुख को सहेजा है

रिश्तों की पोटली बांधी है।


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