STORYMIRROR

Axan Mikaya

Romance Tragedy

3  

Axan Mikaya

Romance Tragedy

विश्वास

विश्वास

1 min
60

ग़लती की मैने जो तुम पर विश्वास किया

तुमने मुझे दुनिया समझा जो तुमने ये आघात किया

क्या ग़लती मैंने की जो तुम पे विश्वास किया


इस विश्वासघात भरी दुनिया में मैंने 

तुम को अपना समझा 

तुमने ऐसा दर्द दिया ये कैसा ये आघात किया

क्या ग़लती मैन की तुम पर विश्वास किया


तुम ग़लती करते रहे धोखे को मज़बूरी का नाम दिया

मदद तुम्हारी मैंने की बदले मे आघात किया

क्या ग़लती मैंने कि तुम पर विश्वास किया


लो मैंने अपने ग़लती मानी और अनुभव का इसे नाम दिया

तुमने अच्छा दर्द दिए क्या अच्छा ये उपहास किया

क्या ग़लती की मैंने कि तुम पर विश्वास किया



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance