विद्यार्थी जीवन...।
विद्यार्थी जीवन...।
स्कूल का पहले दिन मन होता उत्साहित,
अपने दोस्तों से मिलने का,
नयी यूनिफॉर्म नया बस्ता मिलने की खुशी,
फिर नये नये दोस्त बनाने की खुशी,
क्लास में वो फस्ट शीट पर बैठने की खुशी,
सचमुच विद्यार्थी का जीवन उस मिट्टी भांति,
जिसको सांचे में ढालने का कार्य करता एक शिक्षक,
जो कभी कठोर तो कभी नरमी दिखाता,
कभी दोस्त बन बच्चों का साथी बन जाता,
खेलकूद मौज मस्ती में पढ़ाई का आधा बोझ कम हो जाता,
सचमुच विद्यार्थी जीवन एक तरह से वो बीज है,
जिसे अधिक ध्यान और रखरखाव की आवश्यकता होती,
थोड़ी सी धूप रूपी मार तो कभी पानी रूपी लाड़ की,
तो वक्त वक्त पर कभी उन जैसा बनने की जरूरत होती,
तभी बच्चे शिष्टाचार का महत्व समझते,
पढ़ाई को महत्व देते,
हर वक्त डांटना बच्चों की प्रगति में बाधा है,
इसलिए बच्चों को बदलने से पहले खुद को बदलो,
उनको उनके जैसा बन अपनी बात को समझाओ,
फिर देखो वो बीज कब पेड़ बन लोगों की मदद करता है।
