STORYMIRROR

Hemisha Shah

Abstract

3  

Hemisha Shah

Abstract

विधाता तेरी केसी ये लीला

विधाता तेरी केसी ये लीला

1 min
285

विधाता तेरी कैसी ये लीला

कभी चेहरे पे ख़ुशी 

कभी चेहरा पड़ जाये पीला 


कभी सुबह लगे सुहानी 

कभी उस पे कहर कहानी 


कहीं लहराते खेत की कहानी 

कहीं सूखे से धरती रो जानी  


कहीं शबनम और फूल खिलखिलाते

कहीं बाढ़ में पूरे गांव बह जाते


कहीं दिखे उत्तंग बर्फीली चोटियाँ 

कहीं बिखरे लावा की गोटियाँ


बस में नहीं कुछ भी हमारे

वही नीति जो लिखी हाथों में हमारे


जो जनम लिया वो विनाशी है

हे विधाता तू ही अभिलाषी है...


तू चाहे तो जग को हंसाये

तू चाहे सब को रुलाये


कभी तू रौद्र कभी तू रंगीला 

विधाता तेरी कैसी ये लीला...



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract