STORYMIRROR

Hemisha Shah

Children

3  

Hemisha Shah

Children

बचपन....

बचपन....

1 min
206

मुड़ के वापस आये वो ज़िन्दगी कहां

छोड़ आये जहां बचपन वो ज़िन्दगी कहां?


गुज़रते गए वो बचपन के दिन यू ही वक़्त रहते

वापस आये वो पल ऐसी बंदगी भी कहां?


याद करते हैं अब वो गुज़रा ज़माना

उस पल की खुशियो जैसा अब मौसम भी कहां?


गिरते थे सँभालते थे ठोकर खाते थे

ज़माना चला है ठोकर से कहीं परे

हर मोड़ पे खुद को संभाले इस वक़्त भी कहां?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Children