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Anonymous

Children


2.5  

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बचपन

बचपन

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ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे,

तो मेरा बचपन दिला ज़रा|

फिर से अपने छोटे पाओं से

मुझे घर घूम आना है|

अपने छोटी सी मुस्कान से

सबको फिर से खुश करना है|

इस बड़े हो गए दिल को

छोटा कर दे ज़रा|

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे,

तो मेरा बचपन दिला ज़रा|

फिर से उस सावन मे

बेसुध होके नाचना है|

मचलते हुए नदी के पानी में

फिर से अपनी कागज की नांव छोड़ना है|

बगीचे के वो झूले पे झूलने दे ज़रा|

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे,

तो मेरा बचपन दिला ज़रा|

स्कूल में दोस्ते के साथ फिर से

बर्फ के गोले खाने हैं|

और गाँव के तालाब में

बेफिक्र गोते लगाने है|

चिड़िया का वो चहकना सुनने दे ज़रा|

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे,

तो मेरा बचपन दिला ज़रा|

मिटटी के खिलोने बनाके

फिरसे उनसे खेलना है|

टूट गए खिलौने तो मन भरके रोना है|

बचपन की उन यादों में बहने दे ज़रा|

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे,

तो मेरा बचपन दिला ज़रा|

बचपन के उस गली में फिरसे मुझे जाना है|

पुराने उन लम्हो को फिर से

आंखो में बसाना है|

एक जैसी लगने वाली

इस ज़िन्दगी से फुरसत दिला ज़रा|

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे,

तो मेरा बचपन दिला ज़रा| 


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