STORYMIRROR

khushi kishore

Classics Inspirational Children

4  

khushi kishore

Classics Inspirational Children

जिंदगी से कुछ पल चुराए

जिंदगी से कुछ पल चुराए

1 min
315

चलो इस भागती सी जिंदगी से कुछ पल चुराए

पक्की सड़क से उतर कच्चे रास्तों पर दौड़ लगाए

भुल कर अपनी उम्र और ओहदे मिट्टी में बैठ जाए


चलो इस भागती सी जिंदगी से कुछ पल चुराए

नदी किनारे बैठ ढलते सूरज से बतियाएं ले

मंदिर की घंटियों को बजा नतमस्तक हो जाए


चलो इस भागती सी जिंदगी से कुछ पल चुराए

ओस की बूंदों को अपनी हथेलियों पर सजाएं

चहचहाती चिडियों संग कोई गीत गुनगुनाएं


चलो इस भागती सी जिंदगी से कुछ पल चुराए

बारिश में बादलों संग उसी बचपन में लौट जाए

मेरी नाव सबसे सुंदर! फिर एक दूजे को चिढ़ाए

 

चलो इस भागती सी जिंदगी से कुछ पल चुराए

कोयले पर सिंकी चटपटी मकई संग पहेलिया बुझाए

कुल्हड़ वाली चाय की गर्माहट में फिर कहकहे लगाए


चलो इस भागती सी जिंदगी से कुछ पल चुराए

फूलों की क्यारियों में तितलियों के पीछे भागे

बावरी हवाओ संग फिर किसी पेड़ पर चढ़ जाए


चलो इस भागती सी जिंदगी से कुछ पल चुराए

बचपन के सारे खेल एक एक कर खेल आए

रेल के डब्बे बन फिर छुक छुक रेलगाड़ी चलाए

चलो आज बच्चों को मस्ती भरा बचपन लौटाए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics