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khushi kishore

Abstract


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khushi kishore

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ओ निंदिया..

ओ निंदिया..

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ओ निंदिया मेरी निंदिया कहाँ उड़ चली 

मेरे ख्वाहिशों के रंग पिरो के कहाँ उड़ चली

ओ निंदिया मेरी निंदिया कहाँ उड़ चली।।

आजा मेरे कमरे में बत्तियां बुझ चुकी हैं

ओ आजा मेरी रातों को इंतजार है बस तेरा 

ओ निंदिया मेरी निंदिया कहाँ उड़ चली।।

देर से अंखियों में आस संभाले हुए तेरा

रात के लम्हों में भटक रही हूं मैं कहीं ।।

ओ निंदिया मेरी निंदिया कहाँ उड़ चली

मेरे ख्वाहिशों के रंग पिरो के कहाँ उड़ चली।।


फिल्म: जहरीला इंसान

धुन: ओ हंसिनी 


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