Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Kajal Manek

Tragedy


3  

Kajal Manek

Tragedy


वास्तविकता

वास्तविकता

1 min 242 1 min 242

मतलबी इंसान हैं सारे,

कितना भी कर लो किसी के लिये पूछते तक नहीं,

हर बार दुत्कारते हैं भावना समझते तक नही,


रुलाया जाता है अच्छे और सीधे लोगों को यहां,

प्यार की कीमत नहीं यहां,


आसानी से बिक जाता है इंसान,

खेल बन गया है प्यार,

भावनाओं का लगा दिया है बाजार,


दिल से खेलते हैं फिर हँस के निकल जाते हैं,

सीधे लोग इस खेल में जल्दी फँस जाते हैं,


कभी किसी से बाँटना नहीं अकेलापन अपना,

हर इंसान यहाँ इसलिये ताक लगाए बैठा है, 

ताकि भावना से खेल के तोड़ दे वो आपका हर सपना,


यही है आज के जमाने की वास्तविकता,

जहां हर कोई बस मतलब और काम आने पर पूछता।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Kajal Manek

Similar hindi poem from Tragedy