STORYMIRROR

उर्वील सिंह

Drama

1  

उर्वील सिंह

Drama

वास्ता तुम्हे अधूरे इश्क़ का

वास्ता तुम्हे अधूरे इश्क़ का

1 min
33


अब चांदनी भी लौट चली,

चाँद की पनाहों में।

शाम भी कैद हो चली है,

रात की बाहों में।।


वास्ता तुम्हे अधूरे इश्क़ का,

की लौट आओ ना।

कलेजा फट जाएगा,

तुम्हे देख गैरो की बाहों में।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama