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AVINASH KUMAR

Tragedy

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AVINASH KUMAR

Tragedy

उठती है टीस मेरे दिल में

उठती है टीस मेरे दिल में

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रह रह कर उठती है टीस मेरे दिल में

क्यों ख्वाब मेरा पूरा ना हो सका

तू क्यों आखिर मेरा ना हो सका

क्यूँ सपना हमारा पूरा ना हो सका


सब दर्द तो मैं झेल भी लूं

पर यह दर्द मुझसे झेला नहीं जाता

तू आखिर क्यों मुझे इतना तड़पाता

आखिर क्यों नहीं तू मेरा हो जाता


जबकि देखा था दोनों ने यह सपना

फिर जाति-पाति कहाँ से आई

अब तो तड़पता रहता अकेला

तू क्यूँ हो गई आखिर पराई


गुजारा तुम बिन होता नहीं

रातों को भी सोता नहीं

तुमको गए एक अरसा हुआ

फिर भी मैं किसी और का हुआ ही नहीं


आखिर तू कब तक तड़पायेगा

कब तू मेरा हो जाएगा

या फिर मेरे दर्द का जश्न मनाएगा

मेरा सपना आखिर कब पूरा हो जाएगा


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