Navni Chauhan
Fantasy Others
पंछी बन
उन्मुक्त गगन में,
फिरूं हर गली, हर नगर में,
चुनूं दाना डगर- डगर में,
विचरूं ये विस्तृत संसार
पल भर में।
पापा, मेरे पा...
बोझ
कली और भँवरा
माँ और वात्सल...
बचपन
कितना आसान है
मां तुझे सलाम
औकात
मुस्कुराहट
दस्तक
मुरलिया की धुन जबसे कानों पड़ी है बँधी डोर से हम खिंचे जा रहे थे। मुरलिया की धुन जबसे कानों पड़ी है बँधी डोर से हम खिंचे जा रहे थे।
आ जाओगे चुपके से तुम मेरे ख्याल में निकलेगा चांद ' पूर्णिमा' को विश्वास है। आ जाओगे चुपके से तुम मेरे ख्याल में निकलेगा चांद ' पूर्णिमा' को विश्वास है।
वह रे शिल्पा तेरे साथ शाम बतियाने में क्या खूब होगी। वह रे शिल्पा तेरे साथ शाम बतियाने में क्या खूब होगी।
ईश्वर जैसा कोई बन जाये और सत्य के चरम बिंदु को पा ले ईश्वर जैसा कोई बन जाये और सत्य के चरम बिंदु को पा ले
रहने को तो महल भी थे लाजवाब मेरे पास तेरे दिल के किसी कोने में बस बसर की बात थी रहने को तो महल भी थे लाजवाब मेरे पास तेरे दिल के किसी कोने में बस बसर की बात...
प्यार की पूजा करने वाली, मेरी प्रियतमा बड़ी दुलारी। प्यार की पूजा करने वाली, मेरी प्रियतमा बड़ी दुलारी।
कोई पूछे कि खुश क्यूँ हो तो लबों पर नाम तेरा आये। कोई पूछे कि खुश क्यूँ हो तो लबों पर नाम तेरा आये।
तेरी जुल्फों में आसमां खो गया जैसे कोई यार का दीवाना खो गया तेरी जुल्फों में आसमां खो गया जैसे कोई यार का दीवाना खो गया
देखेंगे आसमान को सिंदूरी से स्याह होते हुए कितने नए रंग आसमान में भर जाएंगे देखेंगे आसमान को सिंदूरी से स्याह होते हुए कितने नए रंग आसमान में भर जाएंगे
ही' से है प्रीत अनौखी, अपनी राह बनाली है जिसको यार, बनाले अपना...............।【4 ही' से है प्रीत अनौखी, अपनी राह बनाली है जिसको यार, बनाले अपना..................
नियति और परिणति के बीच अपने होने का औचित्य। नियति और परिणति के बीच अपने होने का औचित्य।
बस गयी हो तुम इस तरह दिल में की जैसे सूरज मुखी और भानु। बस गयी हो तुम इस तरह दिल में की जैसे सूरज मुखी और भानु।
इस धरा से आसमां तक तुम ही तुम बस ...अनन्त तक समाएं। इस धरा से आसमां तक तुम ही तुम बस ...अनन्त तक समाएं।
उनकी आज बहुत याद आ रही है। उनकी आज बहुत याद आ रही है।
वापस लौटे उन गलियों जहाँ कर गये मेरा प्रेम को अनदेखी। वापस लौटे उन गलियों जहाँ कर गये मेरा प्रेम को अनदेखी।
किसी सपने का हक़ीक़त होने के जैसा है। किसी सपने का हक़ीक़त होने के जैसा है।
आसमान से उतरे हैं दो बादल के टुकड़े नीलकंठ बन विचर रहे हैं। आसमान से उतरे हैं दो बादल के टुकड़े नीलकंठ बन विचर रहे हैं।
मैं ख़ुद को खत्म कर रहा हूं होले होले वो बात शुरुआत की करते हैं....... मैं ख़ुद को खत्म कर रहा हूं होले होले वो बात शुरुआत की करते हैं.......
मेरे लिये वक्त तो निकालिये मेरे में कभी तो खो जाये आप। मेरे लिये वक्त तो निकालिये मेरे में कभी तो खो जाये आप।
चल दूर कहीं चले जाएँ चल चल फिर से जी ले बो पल चल दूर कहीं चले जाएँ चल चल फिर से जी ले बो पल