Navni Chauhan
Fantasy Others
पंछी बन
उन्मुक्त गगन में,
फिरूं हर गली, हर नगर में,
चुनूं दाना डगर- डगर में,
विचरूं ये विस्तृत संसार
पल भर में।
पापा, मेरे पा...
बोझ
कली और भँवरा
माँ और वात्सल...
बचपन
कितना आसान है
मां तुझे सलाम
औकात
मुस्कुराहट
दस्तक
कदम बढ़ा रहे थे दोनों मगर अब सिर्फ यादें थीं पलकें भिगोने को। कदम बढ़ा रहे थे दोनों मगर अब सिर्फ यादें थीं पलकें भिगोने को।
बुराई का सर्वनाश हुआ है, अच्छाई का अहसास हुआ है, बुराई का सर्वनाश हुआ है, अच्छाई का अहसास हुआ है,
शस्य श्यामला के नव श्रृंगार से प्रफुल्लित अतिथि ऋतु बसंत है । शस्य श्यामला के नव श्रृंगार से प्रफुल्लित अतिथि ऋतु बसंत है ।
अब तुम यूँ अपने हाथों से न खिलाओ, लोग कहेंगे वर्ना 'बूढ़ी में कुछ तो है बात। अब तुम यूँ अपने हाथों से न खिलाओ, लोग कहेंगे वर्ना 'बूढ़ी में कुछ तो है बात।
जहाँ खामोश रहना है वहाँ मुँह खोल जाते हैं।। जहाँ खामोश रहना है वहाँ मुँह खोल जाते हैं।।
दुनिया से अंजान हूं सब कहते बहुत नादान हूं दुनिया से अंजान हूं सब कहते बहुत नादान हूं
तब तक ना जाने कितनो के घर चलते रहेगे ? और खुलते रहेगे तवायफखाने ! तब तक ना जाने कितनो के घर चलते रहेगे ? और खुलते रहेगे तवायफखाने !
तेरी ऊँगलीयाँ पकड़ कर जो हमने राह गुज़ारी है। तेरी ऊँगलीयाँ पकड़ कर जो हमने राह गुज़ारी है।
कल्पनाओं से देती हूँ उष्णता अनंत इच्छाएं बन बरसती हूँ कल्पनाओं से देती हूँ उष्णता अनंत इच्छाएं बन बरसती हूँ
रंगों और खुशबू की सुंदरता का संगम। भर देता जीवन में एक नई तरन्नुम।। रंगों और खुशबू की सुंदरता का संगम। भर देता जीवन में एक नई तरन्नुम।।
यह झ़ील कौन है यह झ़ील कौन है बारिश़ में आया तुफाँ या है कोई हवा का झोंका। यह झ़ील कौन है यह झ़ील कौन है बारिश़ में आया तुफाँ या है कोई हवा का झोंका।
मेरी जान मेरी चाहत सुनो मॉस्क तुम पहन लो मेरी बात को तुम समझो खुद को कोरन्टीन करलो। मेरी जान मेरी चाहत सुनो मॉस्क तुम पहन लो मेरी बात को तुम समझो खुद को कोरन्टीन...
कमज़ोर बेटियाँ नहीं.... कमज़ोर तो आपकी ‘सोच’ है। कमज़ोर बेटियाँ नहीं.... कमज़ोर तो आपकी ‘सोच’ है।
मेरा मन न जाने कितने काश और कशमकश में उलझ जाता है.. मेरा मन न जाने कितने काश और कशमकश में उलझ जाता है..
और हाँ मत ढूँढो कंधे ! क़ि सहारे, सरक जाया करते हैं ! और हाँ मत ढूँढो कंधे ! क़ि सहारे, सरक जाया करते हैं !
मुखमंडल रक्तिम हुआ, उषा क्रोधावेश। प्रियतम सूर्य समीप तो , होता भस्म अशेष मुखमंडल रक्तिम हुआ, उषा क्रोधावेश। प्रियतम सूर्य समीप तो , होता भस्म अशेष
दिल की चाहत का वर्ष इंतज़ार लाया बसंत बाहर जीवन के दिन चार होली हर्ष हज़ार रफ्ता रफ्ता दिल की चाहत का वर्ष इंतज़ार लाया बसंत बाहर जीवन के दिन चार होली हर्ष हज़ा...
मेरे दिल को होगा पूरा यक़ीन तेरे आने का तभी, चल क़दम बढ़ा आगे और लग यूँ मेरे गले अभी। मेरे दिल को होगा पूरा यक़ीन तेरे आने का तभी, चल क़दम बढ़ा आगे और लग यूँ मेरे ...
दुःख - दर्द बाँटना चाहूँ, मुख से कुछ कह न पाऊँ, दुःख - दर्द बाँटना चाहूँ, मुख से कुछ कह न पाऊँ,
शून्य में जाने लगती हैं मन की भावनाएं दम तोड़ने लगती हैं अपनी संवेदनाएं शून्य में जाने लगती हैं मन की भावनाएं दम तोड़ने लगती हैं अपनी संवेदनाएं