तू कहीं नहीं है
तू कहीं नहीं है
जिस दर्द से गुजर रही हूं
उस दर्द में तू नहीं है
जिस खुशी में खुश हो रही हूं
उस खुशी में तू नहीं है
जिस पल में जी रही हूं
उस पल में तू नहीं है
ढूंढती रही हमेशा जो सुकून
उस सुकून में तू नहीं है
ढूंढा बहुत तुझे सपनो में भी
तू सपनो में भी नही है
दिल में झांक कर देखा
तो तू मेरे दिल में भी नही है
कैसा फिर ये तेरा प्यार है
जब तू कहीं भी नही है
दिल के आईने में भी तेरी
परछाई तक नहीं है।

