तुम्हारी याद
तुम्हारी याद
तुम्हारी याद भर से
एक ऊर्जा मिलती है
एक दिशा मिलती है
एक सुकून मिलता है
और इन प्राप्तियों के
आनन्द में डूब जाता हूँ मैं
सोचो कब मिले थे
क्या बात हुयी थी
कहा था तुमने मुझसे,
मैंने तुमसे
मिलकर भी
और बिना मिले भी।
कितने लोग गुजरते हैं
रोज सामने से
बातें होती है
खूब बातें होती हैं
योजनाएं बनती हैं
वायदे होते हैं
और सब हवा की तरह
उड़ जाता है।
तुम्हारी बात और है
अब तक हो मुझमें
रूप के रूप में
बात के रूप में
चाहत के रूप में
ऊर्जा के रूप में
और सबसे बड़ी बात तो ये है
याद करते ही
उपस्थित हो जाते हो
और बात करने लगते हो
उसी तरह जैसे बात किये थे मिलकर
या सन्देश दिये थे दूर से।
