Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

Ravinder Raghav

Romance


4.5  

Ravinder Raghav

Romance


तुम को देखा था पड़ोसी की बारात में

तुम को देखा था पड़ोसी की बारात में

1 min 221 1 min 221

तुम को देखा था पड़ोसी की बारात में

और देख के देखता ही रह गया, 


सोचा तुम्हें मेनका कहूं या उर्वशी

ये सोच के सोचता ही रह गया, 


नज़र मिला कर फिर तुमसे 

नज़र मिला के नज़रों में ही रह गया, 


नज़र मिला के तुमने प्रेम दीप जला लिया

प्रेम दीप जला के जलाता ही रह गया, 


गलियों में मिलकर तुमसे

तेरी गलियों में ही रह गया, 


सपनों में मिलकर तुमसे

तेरे सपनों में ही रह गया, 


अंत में तुम को देखा दुल्हन के लिबास में

और देख के देखता ही रह गया।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Ravinder Raghav

Similar hindi poem from Romance