STORYMIRROR

तुम ही तुम

तुम ही तुम

1 min
363


मेरी हर बात में शामिल हो तुम

मेरी हर रात में कामिल हो तुम


इबादत में तुम हो इनायत में तुम

शबाब में तुम हो शिकायत में तुम


जहाँ तुम ही तुम हो वहां हम

तुम्हारी यादों में गुम,


शाम सवेरे हर लम्हें में तुम,

करते है एक ही दुआ ख़ुदा से,


जब भी चाहत हो दीदार-ए-सनम का

नज़र के सामने हो तुम ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance