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Ajita Singh

Romance

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Ajita Singh

Romance

तुम और मैं

तुम और मैं

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तुम "संयम" सा प्रवाहमान, मेरी नस-नस में

तुम "मौन" सा विधमान, मन मस्तिष्क में


मैं जीवन पथ की अविरल धारा कंटक वन में

मैं निर्झर सा सूखा मन, तुम बरसे मन में ....



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