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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Others


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GOPAL RAM DANSENA

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तुझ पर मन तनी गहराई है

तुझ पर मन तनी गहराई है

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यह कविता जो मैं पिछले साल गर्मी में प्रत्यक्ष अनुभव है, जो मेरे जीवन को बदल दिया, तथा खुशी को परिभाषित कर सका पेश है---


जब मस्त हो बहार आती है 

श्रृंगार कर प्रकृति इठलाती हैI 

सुस्वर श्रवण घनी अमराई है 

तुझ पर मन तनी गहराई है I 


मेघ गर्जन सर सर स्वर है 

धरा अम्बर सब दर तर है I 

अपलक नयन मन भर आई है

तुझ पर मन तनी गहराई है I 


नदी ताल जल प्रवाह पल पल 

अटूट नाद संगीत मय जल 

नीर संग खग चहक आई है 

तुझ पर मन तनी गहराई है I 


सुना उदर चुभती धूप है 

थिरकते पांव उल्लासित रूप है 

जीवन का क्षण आनन्द समायी है

तुझ पर मन तनी गहराई है I 


कोई तुझे जाने वहां नहीं विराम है 

देखें तुझे कहाँ तू नयनाभिराम है 

तेरी छवि कण कण में बन आई है 

तुझ पर मन तनी गहराई है I 


खुशियाँ ढूंढता भागा फिरता था 

दूसरों को देख सीना चीरता था 

आज सच जान मन हर्षायी है

तुझ पर मन तनी गहराई है I 


मन बावरा देख प्रकृति को 

कैसे खुश है उस मति को 

आनन्द ताल भर लबलबाई है

तुझ पर मन तनी गहराई है I 



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