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S N Sharma

Romance Tragedy

4  

S N Sharma

Romance Tragedy

तन्हाइयों की बाहों में।

तन्हाइयों की बाहों में।

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बहकती रात को तन्हाइयों की बाहों में।

गुजर रही है जिंदगी किसी की आहों में।


वही नदी वही पीपल वही किनारा है।

वही पलकें वही है अक्स इन निगाहों में।


यह वही मोड़ है तुमने हमें जहां छोड़ा।

खड़े इस मोड़ पर अब भी तुम्हारी राहों में।


हर सुबह शाम हुई उम्र यूं गुजरती रही।

और रहा कैद दिल तेरी उन्हीं अदाओं में।


अभी भी याद है हमको वह सुहाना मंजर

समय गजब था वो गुजरा तेरी पनाहों में।


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