तन्हा
तन्हा
जिंदगी में वक़्त भी तन्हा गुजारा है यहां
की मिला कोई नहीं मुझको सहारा है यहां
डूबा हूँ तन्हाई के पानी में मैं तो ख़ूब हूँ
प्यार का ही कब मिला मुझको किनारा है यहां
दोस्ती की बाँटता फ़िरता मुहब्बत कौन है
दुश्मनी का हर किसी में ही शरारा है यहां
प्यार की रखता यहां है कौन किससे गुफ़्तगू
हर तरफ़ देखो अदावत का नज़ारा है यहां
पूछने पर प्यार से कोई नहीं देता ज़वाब
हर कोई देखो ज़बां से यार खारा है यहां
और उसनें फेकें पत्थर नफ़रतों के है बहुत
रोज़ उसको प्यार से मैंनें पुकारा है यहां
अब ख़ुशी का इशारा जीस्त में आज़म नहीं
रोज़ ग़म का यार बस उठता इशारा है यहां।
