Maitry Bhandari
Romance
तेरी आदतों से जुड़ने लगी हूँ
तेरी तन्हाइओं से डरने लगी हूँ।
तेरे साथ रह कर जीना सीख रही हूँ
तेरी बाहोंं मे खुद को निखारने लगी हूँ।
तुझे शृंगार बना के खुद को संवारने लगी हूँ
तेरी आदतों से जुड़ने लगी हूँ।
नजदीकियाँ
रूक जाना नहीं
सपनों का शहर
युवा
किताबे
आज़ाद पंछी
चाहत
तेरी यादें
तेज
आखिर प्यार तो...
तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था ! तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था !
एक तुम्हारा दिल और एक परछाई, जो मेरे दिल की थी। एक तुम्हारा दिल और एक परछाई, जो मेरे दिल की थी।
खास दिन का और महज़ चंद रुपयों की चीज़ का मोहताज कोई क्यूँ रहे। खास दिन का और महज़ चंद रुपयों की चीज़ का मोहताज कोई क्यूँ रहे।
निक्टर प्रेमवासना की दिव्य कली है! निक्टर प्रेमवासना की दिव्य कली है!
तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो। तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो।
लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में। लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में।
माना मुश्किलें हैं इस संसार में आसान नहीं कुछ भी इतना, माना मुश्किलें हैं इस संसार में आसान नहीं कुछ भी इतना,
कोमल बांहें फैला जैसे आलिंगन जादू जगाया मन चितवन से व्याकुलता आलस को भगाया कोमल बांहें फैला जैसे आलिंगन जादू जगाया मन चितवन से व्याकुलता आलस को भगाया
तू क्यों आता है लौट के जाने के लिये कैसे खुद में थाम लूँ, बसा लूँ खुद में तुझे। तू क्यों आता है लौट के जाने के लिये कैसे खुद में थाम लूँ, बसा लूँ खुद में तु...
नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा
तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है। तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है।
तुम्हें समेट लिया है भीतर जैसे जाड़ों में समेट लिए जाते हैं धरती पर बिखरे पारिजात। तुम्हें समेट लिया है भीतर जैसे जाड़ों में समेट लिए जाते हैं धरती पर बिखरे प...
रख सकता था तुम्हे और तुम्हारे उस मखमल सम मृदुल एहसास को। रख सकता था तुम्हे और तुम्हारे उस मखमल सम मृदुल एहसास को।
आसमान की कहानी सुनो, मिलन का मौसम है। प्यार की राहों में, सुबह की पहली किरन है। आसमान की कहानी सुनो, मिलन का मौसम है। प्यार की राहों में, सुबह की पहली किरन ह...
पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं। पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं।
उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई। उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई।
वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक… वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक...
जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो। जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो।
ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स, ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स,
बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा। बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा।