STORYMIRROR

Maitry Bhandari

Others

2  

Maitry Bhandari

Others

आज़ाद पंछी

आज़ाद पंछी

1 min
521

तू क्यूँ बंद करना चाहे चार दीवारी में,

मैं तो आज़ाद पंछी हूँ खुले आसमान की।


तू कब तक बंद करेगा पिंजरे में,

मैं तो हवाओं मिलता पंरिदा हूँ।


कब तक रहूँ मैं कुएँ में ,

मैं तो नदियों की मछली हूँ।


जंजीरों से बंध पायी कहाँ ?

मैं तो खुले आसमा की पंछी हूँ ।


मैं वह शेरनी नहीं जो क़ैद रहूँ ,

मैं तो जंगलों की रानी हूँ।


तू क्यूँ बांधे मुझे इन सीमाओं से,

जब वह अदृश्य है।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन